शेष यादव-
कबीरधाम:
कवर्धा जिले में हुए बलवे ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। लेकिन क्या पुलिस अपनी जिम्मेदारी निभा रही है या फिर अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर रही है?
लोहारीडीह गांव में शिवप्रसाद साहू कोचरू की मौत के बाद ग्रामीणों ने उपसरपंच पर हमला किया, जिसमें उनकी जलकर मौत हो गई। पुलिस ने 160 लोगों को जेल भेजा, लेकिन क्या यह कार्रवाई न्यायसंगत है?
कवर्धा एसपी का वीडियो वायरल हुआ, जिसमें उनके सामने कैसे एक महिला को महिला आरक्षकों द्वारा डंडे से मारते दिखे। यह घटना पुलिस प्रशासन की गुंडागर्दी को दर्शाती है। क्या पुलिस अपने अधिकारों का उपयोग न्याय दिलाने के लिए करती है या फिर अपनी तानाशाही को बढ़ाने के लिए?
एक आरोपी प्रशांत साहू की जेल में मौत हो गई। क्या यह पुलिस की लापरवाही का नतीजा है या फिर कुछ और?
यह घटना समाज में व्याप्त हिंसा और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाती है। क्या पुलिस अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर रही है? क्या न्याय व्यवस्था में खामी है? ये सवाल जवाब मांगते हैं।
क्या समय आ गया है कि पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर पुनर्विचार किया जाए? क्या समय आ गया है कि पुलिस को अपनी जिम्मेदारी का एहसास कराया जाए?
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