गणेश चतुर्थी के अवसर पर लोग गणेश जी की पूजा करते हैं, लेकिन कुछ लोग उनकी पूजा में आस्था और सम्मान की कमी दिखाते हैं। वे गणेश जी को विभिन्न रूपों में दर्शाते हैं, जैसे कि डॉक्टर, वकील, या साड़ी पहने हुए। यह गणेश जी का मजाक बनाने जैसा है और उनकी पवित्रता को कम करता है।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि धर्म के ठेकेदार, जो खुद को धर्म के रक्षक कहते हैं, वे कहाँ हैं? वे क्यों नहीं विरोध करते हैं जब गणेश जी की पूजा में आस्था और सम्मान की कमी होती है? क्यों नहीं वे लोगों को समझाते हैं कि गणेश जी की पूजा में सादगी और शुद्धता होनी चाहिए?
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