बिलासपुर: स्मार्ट सिटी के नाम पर बिलासपुर शहर को विकसित करने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जिला अस्पताल की हालत देखकर यह सवाल उठता है कि क्या यही है स्मार्ट सिटी का चेहरा? यहाँ मरीजों की जान की कोई परवाह नहीं है, ना सरकार को और ना ही प्रशासन को।
जिला अस्पताल में नसबंदी के ऑपरेशन के दौरान बिजली गुल हो गई और मोबाइल के टॉर्च की रोशनी में ऑपरेशन किया गया। यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और लोगों में आक्रोश है।
क्या यही है स्मार्ट सिटी की स्वास्थ्य सेवा? क्या यही है सरकार की प्राथमिकता? गरीबों की कहीं सुनवाई नहीं है, ना सरकार ना प्रशासन। आखिर क्या मजबूरी है सरकार की जो सुविधाओं के नाम पर सब बेकार है।
स्मार्ट सिटी के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं की हालत दयनीय है। जिला अस्पताल में 7 जनरेटर होने के बावजूद सभी बंद थे, जिससे ऑपरेशन थिएटर में अंधेरा हो गया।
यह मामला न केवल लापरवाही का है, बल्कि यह मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ करने का भी है। सरकार और प्रशासन को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए और मरीजों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करनी चाहिए।
क्या सरकार और प्रशासन को इस मामले में जवाबदेही लेनी चाहिए? क्या स्मार्ट सिटी के नाम पर हमें ऐसी ही स्वास्थ्य सेवाएं मिलनी चाहिए?
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