"ए ददा रे" फिल्म को देखकर लगता है कि यूट्यूबर आनंद मानिकपुरी ने अपने ओवरकनफिडेंस को अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है। फिल्म में तंत्र-मंत्र, जादू-टोना और चटिया-मटिया जैसे घिसे-पिटे विषयों को नए सिरे से परोसने की कोशिश की गई है, लेकिन दर्शकों को यह पुरानी शराब नए बोतल में परोसने का यह प्रयास पसंद नहीं आया है।
फिल्म की कहानी और निर्देशन आनंद मानिकपुरी के हाथों में है, और लगता है कि उन्होंने अपने यूट्यूब वीडियोज की सफलता को फिल्म में दोहराने की कोशिश की है, लेकिन यहाँ वे बुरी तरह से फेल हुए हैं। फिल्म के डायलॉग, एक्शन और कॉमेडी सब कुछ इतना कमजोर है कि दर्शकों को हंसाने के बजाय उन्हें नींद आ जाती है।
फिल्म के हीरो आनंद मानिकपुरी की एक्टिंग भी उतनी ही कमजोर है जितनी कि फिल्म की कहानी। लगता है कि उन्होंने अपने यूट्यूब वीडियोज में मिमिक्री और कॉमेडी से दर्शकों को हंसाने की कोशिश की है, लेकिन फिल्म में यह तरीका बिल्कुल फेल हो गया है।
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