छत्तीसगढ़ फ़िल्म इंडस्ट्री से जुड़ा एक नाम इन दिनों सुर्खियों में है—लेकिन वजह कोई फ़िल्मी सफलता नहीं, बल्कि एक युवती के साथ कथित बेरहमी से मारपीट और धोखे का गंभीर मामला है। फ़िल्म निर्माता मोहित साहू के ख़िलाफ़ थाने में दर्ज शिकायत ने उसकी कथित “महिला-समर्थक” छवि पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मामला प्रेम प्रसंग से जुड़ा बताया जा रहा है। शिकायतकर्ता युवती का आरोप है कि मोहित साहू उसे उज्जैन ले गया, वहाँ शादी की रस्में करवाईं, लेकिन बाद में रायपुर लौटने पर शादी से साफ़ मुकर गया। यही नहीं, युवती ने उसके साथ मारपीट और मानसिक प्रताड़ना के भी गंभीर आरोप लगाए हैं।
गौर करने वाली बात यह है कि कुछ ही दिन पहले मोहित साहू की फ़िल्म ‘जानकी’ रिलीज़ हुई थी, जिसे महिला प्रधान फ़िल्म बताकर जमकर प्रचार किया गया। मंचों से महिला शक्ति, सम्मान और सशक्तिकरण की बातें की गईं—लेकिन अब सामने आए आरोपों ने इस पूरी कहानी को पाखंड साबित करने जैसा माहौल बना दिया है।
इतना ही नहीं, कुछ समय पहले मोहित साहू ने एक अभिनेत्री की तस्वीर इंस्टाग्राम पर साझा करते हुए लिखा था—
“ये सिर्फ़ मेरी है, जिसे दिक्कत है वो मुझसे बताए।”
अब जब एक युवती द्वारा थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है, तो यही पोस्ट उसकी मानसिकता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि मोहित साहू पहले से शादीशुदा होने के बावजूद कई महिलाओं से संबंध रखता रहा और प्रेम व शादी का झांसा देकर उनका शोषण करता रहा। हालाँकि इन सभी बिंदुओं की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है, लेकिन आरोप बेहद गंभीर हैं।
सिनेमा को समाज का आईना कहा जाता है, लेकिन सवाल यह है कि
क्या ऐसे लोग समाज को दिशा दिखाने के हक़दार हैं, जिन पर ख़ुद महिला उत्पीड़न जैसे आरोप हों?
आज ज़रूरत है दिखावे के नायकों से पर्दा हटाने की। महिला सशक्तिकरण केवल फ़िल्मी संवादों और प्रेस इंटरव्यू तक सीमित नहीं हो सकता। अगर लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला सिर्फ़ एक युवती का नहीं, बल्कि पूरे समाज के भरोसे के साथ धोखा होगा।
न्याय की कसौटी पर अब सिर्फ़ एक नाम नहीं, पूरी सोच खड़ी है
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