"भीड़ का दिखावा या राजनीतिक ताकत? त्रिलोक श्रीवास की राजनीतिक यात्रा में सवालों का घेरा"


त्रिलोक श्रीवास की राजनीतिक यात्रा में एक दिलचस्प मोड़ आया है। विधानसभा का टिकट न मिलने के बाद अब महापौर का टिकट भी उन्हें नहीं मिला है। लेकिन इसके बावजूद, उनके समर्थकों की भीड़ उनके साथ खड़ी है, जो उनकी राजनीतिक ताकत को दर्शाती है।

लेकिन सवाल यह है कि क्या यह भीड़ वास्तव में त्रिलोक श्रीवास की राजनीतिक ताकत को दर्शाती है? या फिर यह सिर्फ एक दिखावा है? क्या त्रिलोक श्रीवास वास्तव में एक मजबूत नेता हैं या फिर वे सिर्फ अपनी भीड़ के बल पर राजनीति कर रहे हैं?

पार्टी को ज़्यादा भीड़ पसंद नहीं है, यह बात स्पष्ट है। अगर ऐसा नहीं होता, तो त्रिलोक श्रीवास को विधानसभा या महापौर का टिकट मिल चुका होता। लेकिन पार्टी के नेतृत्व को लगता है कि त्रिलोक श्रीवास की राजनीतिक ताकत वास्तव में उतनी मजबूत नहीं है, जितनी कि वह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।

हर जगह ज़रूरत से ज़्यादा भीड़ ले जाने के पीछे एक रणनीति हो सकती है। त्रिलोक श्रीवास अपनी राजनीतिक ताकत को दर्शाने के लिए यह कर रहे हैं, लेकिन यह रणनीति उन्हें सफलता नहीं दिला पा रही है। पार्टी के नेतृत्व को लगता है कि त्रिलोक श्रीवास की राजनीतिक ताकत वास्तव में उतनी मजबूत नहीं है, जितनी कि वह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।

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