"क्या फिल्म इंडस्ट्री हमारी संस्कृति को नुकसान पहुंचा रही है? फ़िल्म में भाई-बहन का रोमांटिक रोल एक उदाहरण है"


छत्तीसगढ़ फिल्म इंडस्ट्री में एक नई और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। करण चौहान और किरण चौहान, जो सगे भाई-बहन हैं, एक फिल्म में हीरो-हीरोइन के रूप में नजर आएंगे।

यह खबर न केवल फिल्म इंडस्ट्री में बल्कि समाज में भी चर्चा का विषय बन गई है। लोगों को यह बात समझ में नहीं आ रही है कि कैसे दो सगे भाई-बहन एक फिल्म में प्रेमी प्रेमिका के रूप में काम कर सकते हैं।

यह सवाल उठता है कि क्या फिल्म मेकर्स को यह नहीं पता है कि भाई-बहन का रिश्ता कितना पवित्र होता है? क्या वे यह नहीं समझते हैं कि ऐसी फिल्में समाज में गलत संदेश देती हैं?

कुछ लोगों का मानना है कि फिल्म मेकर्स केवल पैसे कमाने के लिए ऐसी फिल्में बनाते हैं, भले ही इसके लिए उन्हें समाज की मर्यादा को तोड़ना पड़े।

भाई-बहन एक दूसरे के लिए सबसे अच्छे दोस्त होते हैं। वे एक दूसरे के साथ खेलते हैं, हंसते हैं, रूठते हैं, मनाते हैं और एक दूसरे के साथ साझा किए गए बंधन को मजबूत बनाते हैं। भाई-बहन का रिश्ता न केवल परिवार में, बल्कि समाज में भी अहम रोल निभाता है।


यह खबर न केवल फिल्म इंडस्ट्री में बल्कि समाज में भी एक बड़ा सवाल उठाती है। क्या हमें अपनी संस्कृति और परंपराओं को बचाने के लिए कुछ नहीं करना चाहिए? क्या हमें फिल्म मेकर्स को ऐसी फिल्में बनाने से रोकने के लिए कुछ नहीं करना चाहिए?

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