बिलासपुर, 3 मई — गुरु घासीदास विश्वविद्यालय (GGU) में नमाज़ अदा कराने को लेकर हुए विवाद के बाद अब समाज में एक नया मोड़ देखने को मिला है। 'भाईचारा एकता मंच' के बैनर तले आज विश्वविद्यालय परिसर के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया गया, जिसमें प्रोफेसर दिलीप झा मधुलिका समेत 8 हिन्दू शिक्षकों के समर्थन में आवाज़ उठाई गई। प्रदर्शन में सामाजिक कार्यकर्ता, वकील, बुद्धिजीवी और आम नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए।
प्रदर्शन का संचालन कर रहीं अधिवक्ता प्रियंका शुक्ला ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि, "GGU में नमाज़ के नाम पर जो विवाद पैदा किया गया, वह पूरी तरह से गंदी राजनीति का नतीजा है। यह समाज को बांटने की एक सोची-समझी साज़िश है।" उन्होंने बताया कि मंच की टीम ने प्रोफेसर दिलीप झा और उनके परिवार से मुलाकात की और जो जानकारी सामने आई, वह चौंकाने वाली है। पुलिस द्वारा रात 3 बजे दबिश देकर उन्हें जिस तरह "आतंकी" की तरह गिरफ्तार किया गया, उससे परिवार मानसिक रूप से टूट चुका है।
प्रदर्शन में जसबीर सिंह चावला, लखन सुबोध, पवन शर्मा, नंद कश्यप, शाहरुख अली सहित तमाम वक्ताओं ने बारी-बारी से अपनी बात रखी और सरकार की नीयत पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यदि जल्द ही इन प्रोफेसरों पर की गई एफआईआर वापस नहीं ली गई, तो "बड़ा आंदोलन और जन-जागृति अभियान छेड़ा जाएगा।"
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने एकजुट होकर कहा कि जिस तरह बिना पर्याप्त जांच के शिक्षकों पर आरोप लगाए गए, उससे न्याय और प्रशासन दोनों की साख पर सवाल खड़ा होता है। वक्ताओं ने यह भी चेतावनी दी कि अगर सरकार ने जनभावनाओं को नहीं समझा तो आने वाले समय में यह मुद्दा पूरे प्रदेश में उबाल ला सकता है।
कार्यक्रम में मिर्ज़ा आकिब, चिंता देवी, असीम तिवारी, सैय्यद सज्जाद, आशीष, रेहाना खातून, एडवोकेट लखन सिंह, शालिनी गेरा, अख्तर हुसैन, प्रतीक, वीरेंद्र भारद्वाज, गुलाम हैदर, सलीम सहित कई प्रमुख सामाजिक चेहरे भी शामिल हुए।
प्रदर्शन का संदेश स्पष्ट था: सत्ता के सहारे नफरत की राजनीति नहीं चलेगी। समाज को तोड़ने की हर कोशिश के खिलाफ अब साझा स्वर उभरेगा। GGU के विवाद को अब केवल एक विश्वविद्यालय का मुद्दा नहीं माना जा रहा, बल्कि यह "सत्य बनाम सत्ता" की लड़ाई का प्रतीक बनता जा रहा है।
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