"धनेश साहू की फिल्म ‘धनेश की अराधन ुरी तरह फ्लॉप — यूट्यूबर स्टारडम का सच पर्दाफाश"

छत्तीसगढ़ के मशहूर कॉमेडियन और यूट्यूबर धनेश साहू की बहुचर्चित फिल्म ‘धनेश की आराधना ’ सिनेमा घरों में रिलीज़ होते ही बड़ी उम्मीदों के साथ उतरी थी, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म बुरी तरह धड़ाम हो गई।
इस फ्लॉप ने एक बार फिर साफ़ कर दिया है कि मोबाइल में वीडियो देखना और थिएटर में पैसा खर्च कर फिल्म देखना दोनों बिल्कुल अलग बातें हैं।
यूट्यूब पर लाखों व्यूज़ होने से कोई फ़िल्म स्टार नहीं बन जाता — और यह कड़वी हकीकत धनेश की पहली फिल्म ने साबित कर दी है।
हर 5 मिनट में गाना—फिल्म या म्यूजिक एल्बम?
फिल्म देखने आए दर्शकों ने सबसे बड़ी शिकायत की—
“ये फिल्म है या म्यूजिक एल्बम?”
क्योंकि हर पांच मिनट में एक नया गाना शुरू हो जाता है।
लोग थिएटर फिल्म देखने जाते हैं, एलबम नहीं। लगातार गानों ने पूरी कहानी का असर खत्म कर दिया।
कलेक्टर को शराबी दिखाना—लोगों की नाराज़गी बढ़ी
फिल्म में कलेक्टर जैसे बड़े प्रशासनिक अधिकारी का मज़ाक उड़ाया गया है।
इसे लेकर दर्शकों और शहर के लोगों ने नाराजगी जताई।
कलेक्टर को शराबी के रूप में दिखाना कई लोगों को बेहद खटका और सोशल मीडिया पर भी इसको लेकर सवाल उठ रहे हैं कि
क्या मज़ाक के नाम पर किसी भी पद का अपमान सही है?
यूट्यूबर स्टारडम खत्म—ओवर कॉन्फिडेंस की पोल खुली
स्पष्ट है कि यूट्यूब पर शॉर्ट वीडियो और कॉमेडी क्लिप बनाने से फिल्म नहीं चलती।
कई यूट्यूबर अपनी ऑनलाइन पॉपुलैरिटी को ओवर कॉन्फिडेंस में बदल लेते हैं, लेकिन सिनेमा का दर्शक बहुत समझदार है।
पैसा देकर टिकट खरीदने वाला दर्शक वही फिल्म देखता है जिसमें दम हो—सिर्फ फॉलोअर्स होने से फिल्म नहीं चलती।
धनेश साहू की फिल्म का फ्लॉप होना इस इंडस्ट्री के तमाम यूट्यूबर को सोचने पर मजबूर कर देगा कि—
“मोबाइल में व्यूज़ मिलना आसान है, लेकिन थिएटर में सफलता कमाना मेहनत, कहानी और सिनेमा की समझ मांगता है।”

Post a Comment

0 Comments