वन विभाग मे सेटिंग से पैसों का आहरण से लेकर ट्रांसफर रुकवाने मे माहिर वन विभाग के कर्मचारी बिलासपुर वन मंडल मे बन रहा है चर्चा का विषय जाने कौन है!

बिलासपुर  TIME 
वन विभाग में वैसे तो अनेक भ्र्ष्टाचार के मामले उजागर होते रहते हैं लेकिन वन विभाग में कोई अधिकारी ही भ्र्ष्टाचार का पर्याय बन जाय तो मामला गंभीर हो जाता है।
वन विभाग का एक अधिकारी ऐसा भी है जो पिछले कुछ सालों से एक ही जगह में पदस्थ रहकर सुनियोजित तरीके से भ्रष्टाचार कर रहा है। आश्चर्य की बात यह कि  अधिकारियों द्वारा भी उसे संरक्षण दिया जा रहा है।

विभागीय सूत्रों की मानें तो वह अपने से सीनियर अधिकारियों की सेवा सत्कार में कोई कमी नहीं करता है।
 विभाग में आने हर काम का परसेंटेज सही समय पर पहुँचा देता है। इसीलिए तो सभी बड़े अधिकारी उससे खुश रहते है। 

विभागीय सूत्रों की मानें तो हाल ही में वन विभाग में करोड़ों का काम आया था जिसमे से १५% के हिसाब से अधिकारियों को कमीशन घर बैठे पहुँच गया। 

सूत्र बताते हैं कि साहब का ख़ुद का फर्म है जिसमे ही लेनदेन होता है, जिससे साहब की इनकम आय से अधिक हो गई है अगर मामले की बारीकी से जाँच किया जाये तो बहुत कुछ खुलासा होगा मगर विभाग का ध्यान शायद उसके ओर नहीं है हमेशा से छोटे मोटे कर्मचारी के ऊपर ही कार्यवाही और ट्रांसफ़र का गाज गिरते आया है। 

  साहब के करीबियों नें एक बहुत ही गुप्त बात बताई कि साहब के पास एक मंहगी वाली कीमती चार पहिया वाहन है। उन्हें चार पहिया वाहन का नाम तो नहीं पता लेकिन इन्नोवा फॉर्च्यूनर जैसी मेंहगी कार होने का इशारा जरूर किया लेकिन साथ ही साथ उन्होंने बताया कि साहब गाड़ी तो खरीद लिये लेकिन जिसे लेकर कभी भी ऑफिस या विभाग नहीं आते।
उन्होंने एक और रहस्यमय बात बताई की साहब चार पहिया वाहन को आम लोगो से दूर छुपा के रखते है।
मतलब कार की पार्किंग व्यवस्था खुद के घर के बजाय कही और है। मतलब दाल में कुछ काला जरूर है।

सामने वाला यही नहीं रुका कहने लगा कि गाड़ी का नम्बर... फिर अचानक से चुप्पी साध ली!

 लेकिन फिर कहने लगा कि उस पर उच्च अधिकारियों का ब्लाइंड सपोर्ट है वो सब को खुश रखता है उसका बाल भी बाँका नहीं कर सकता है।

  साहब बिल बाउचर पहले ही बनवा कर पैसा का आहरण पहले ही कर लेते है उसके बाद किसी छोटे मोटे ठेकेदार को काम देकर खाना पूर्ति करवा देते है क्योंकि साहब का सभी जगह सेटिंग तगड़ी है तभी तो काम से पहले पैसे निकाल लेते है।
 
विभागीय सूत्र ये भी बताते है कि साहब  इसी भ्र्ष्टाचार रूपी कमाई और सेटिंग के दम पर अवैध रूप से कमाया हुए सरकारी पैसे से शहर के पॉज़ इलाक़े में दो- दो आलिशान मकान भी बनवा लिया है एक मकान में घर वाली तो दूसरे मकान में बाहर... ली रहती है।!

विभागीय सूत्र हमसे सवाल पूछता है कि कोई भी अधिकारी कर्मचारी कर्मचारी एक ही वनपरिक्षेत्र एक दो नहीं सालों से कैसे अंगद की तरह पाँव जमाकर कैसे टीके रह सकता है?

इतना सब कुछ गुप्तवार्ता में बतलाकर विभागीय सूत्र विक्रम के बेताल की तरह आख़िर कहाँ चला गया  हमें नहीं मालूम...!

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