एक गाने की लोकप्रियता से फ़िल्म का हीरो बनना : क्या यह सीजी फ़िल्म इंडस्ट्री की नई मानसिकता है?


सीजी फ़िलम इंडस्ट्री में मेकर्स की फ़िल्म बनाने की मानसिकता पर लोगो ने कही न कहीं सवाल खड़े कर दिए हैं: क्या एक हिट गाने से बन जाता है कोई फ़िल्म का हीरो?

इन दिनों सीजी फ़िल्म इंडस्ट्री में एक अजीब सी मानसिकता देखी जा रही है। मेकर्स का मानना है कि अगर किसी एल्बम का गाना हिट हो जाता है, तो उस गाने के कलाकार को फ़िल्म का हीरो बनाया जा सकता है। लेकिन क्या यह सही है?

क्या एक हिट गाने से कोई कलाकार फ़िल्म का हीरो बन जाता है? क्या उसमें इतनी क्षमता होती है कि वह पूरी फ़िल्म को अपने कंधों पर उठा ले? ये सवाल मेकर्स की मानसिकता पर सवाल उठाते हैं।

क्या मेकर्स को लगता है कि दर्शकों को केवल एक हिट गाने की वजह से फ़िल्म देखने के लिए मजबूर किया जा सकता है? क्या वे यह नहीं जानते कि फ़िल्म की सफलता के लिए फ़िल्म के हीरो का केवल एक पुराना हिट गाना ही काफ़ी नहीं है?

यह सवाल उठता है कि क्या मेकर्स की यह मानसिकता दर्शकों के साथ अन्याय नहीं है? क्या वे दर्शकों को यह नहीं बता रहे हैं कि वे केवल एक हिट गाने की वजह से लोग फ़िल्म देखने के लिए मजबूर हैं?

हाल में इसका उदाहरण है किशन सेन, जिसका एक गाना हिट हुए सालों हो गए। अब उसका गाना किसी के जुबान पर भी नहीं है, लेकिन उसकी बतौर हीरो फ़िल्म "डोली लेके आजा" रिलीज़ होने वाली है।आख़िर लोगो ने किशन सेन को फ़िल्म में बतौर हीरो नहीं देखने की बातें क्यों कह रहे है। तो क्या जनता सिनेमा घर पहुँच पायेगी या नहीं? अब ये तो वक़्त ही बताएगा।

लेकिन यह समय है कि मेकर्स अपनी मानसिकता को बदलें और दर्शकों को अच्छी फ़िल्में और अच्छा हीरो देने के लिए काम करें। एक हिट गाने से कोई कलाकार फ़िल्म का हीरो नहीं बन जाता है, बल्कि उसे अपनी प्रतिभा और मेहनत से यह साबित करना होता है कि वह फ़िल्म का हीरो बन सकता है।

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