सीजी फ़िल्म इंडस्ट्री में एक गंभीर मुद्दा उठ खड़ा हुआ है। हाल ही में रिलीज़ हुई फ़िल्म "डॉली लेके आजा" ने पूरे प्रदेश में अच्छा रिस्पांस प्राप्त किया है, लेकिन फ़िल्म के डायरेक्टर अरविंद कुर्रे ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि उनके फ़िल्म का पोस्टर षड्यंत्र पूर्वक फाड़ा जा रहा है और दूसरे फ़िल्म का पोस्टर लगाया जा रहा है।
इसके अलावा, अरविंद कुर्रे ने यह भी आरोप लगाया है कि सिनेमा हॉल से फ़िल्म को निकालने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। यह एक गंभीर सवाल उठाता है कि क्या एक अच्छा प्रदर्शन कर रही फ़िल्म को ऐसे बीच में निकालने का दबाव बनाया जाना उचित है?
सीजी फ़िल्म इंडस्ट्री में सहयोग और एकता की आवश्यकता है, लेकिन ऐसे मामलों में यह सवाल उठता है कि क्या फ़िल्म इंडस्ट्री में सहयोग की भावना ही नहीं है? क्या अच्छा ख़ासा चल रही फ़िल्म को निकाल कर नाइंसाफी क्यों की जा रही है?
यह एक गंभीर मुद्दा है जिसका जवाब फ़िल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को देना चाहिए। फ़िल्म इंडस्ट्री में सहयोग और एकता की आवश्यकता है, ताकि अच्छी फ़िल्में बनाई जा सकें और दर्शकों को अच्छा मनोरंजन प्रदान किया जा सके।
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