सीजी फिल्म इंडस्ट्री की नई फ़िल्म "झन जाने परदेश" के डायरेक्टर रतन कुमार ने साबित किया है कि पलायन की कहानी बताने वाले खुद पलायन कर सकते हैं। रतन कुमार उड़ीसा से यहाँ कमाने खाने आये हैं हाँ लेकिन उनके साथ यहां बर्बरता और अन्याय नहीं हो रहा है। लेकिन उनकी फ़िल्म की कहानी यह कहती है कि अपने राज्य से घर से बाहर मत जाओ, यहीं कमाओ यही रहो और अपने मिट्टी में मरो।
यह तो व्यंग्य ही है कि रतन कुमार खुद पलायन कर आये हैं और अब वे फिल्म के माध्यम से सीजी के लोगों को पलायन न करने की सलाह दे रहे हैं।
मिली जानकारी के अनुसार रतन कुमार की यह तीसरी फ़िल्म है, और उनकी पिछली दो फ़िल्में कुछ खास नहीं कर पाईं। एक फ़िल्म तो सिनेमाघर तक पहुँच ही नहीं पायी थी, और दूसरी फ़िल्म फ्लॉप रही थी। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि उनकी यह तीसरी फ़िल्म कैसा प्रदर्शन करती है।
रतन कुमार की इस फ़िल्म को देखकर यह सवाल जरूर उठता है कि क्या वे खुद को पलायन करने वाले लोगों की श्रेणी में रखते हैं या नहीं। अगर हाँ, तो फिर वे सीजी के लोगों को पलायन न करने की सलाह क्यों दे रहे हैं? यह सवाल रतन कुमार के लिए एक बड़ा चुनौती हो सकता है।
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