"यादव जी के मधु जी: एक फिल्म जो आपको सोचने पर मजबूर करेगी, लेकिन गलत कारणों से!"


यादव जी के मधु जी एक ऐसी फिल्म है जो प्रेम, परिवार और समाज के बीच के संबंधों को दर्शाने का प्रयास करती है। लेकिन इस फिल्म में कई कमियां हैं जो इसे एक अच्छी फिल्म बनाने से रोकती हैं।

फिल्म की कहानी एक प्रेम प्रसंग के इर्द-गिर्द घूमती है, जो फ़िल्म के हीरो और हीरोइन के बीच होता है। लव मैरिज के लिए लड़का के घर वालो को ऐतराज होता है तो लड़का ऐसा सीन क्रिएट करता है जिससे लव को अरेंज किया जा सके। 
लेकिन जब लड़के की माँ लड़की को शादी के लिए देखने जाती है, तो एक अनोखा मोड़ आता है। लड़की की बुआ के साथ लड़के के बड़े पापा का प्रेम प्रसंग शुरू होता है, जो परिवार और समाज के लिए एक बड़ा चुनौती बन जाता है।

लेकिन फिल्म की सबसे बड़ी कमी इसके अभिनय में है। हीरोइन का अभिनय बहुत ही सामान्य है, और हीरो का अभिनय भी बहुत ही सामान्य है। VFX भी बहुत ही सामान्य है,और कलाकार और डायलॉग का मैच नहीं है। कैमरा वर्क भी बहुत ही सामान्य है, और मेकअप, बैकग्राउंड म्यूजिक, कलर ग्रेडिंग, स्क्रीनप्ले काफ़ी हद तक खराब हैं।

फिल्म में सीजी और हिंदी भाषा का उपयोग किया गया है, जो ना तो पूरा हिंदी में है ना पूरा सीजी में। यह फिल्म मिक्स ऑडियंस के लिए बनाई गई है, लेकिन इसके कारण फिल्म की कहानी और अभिनय पर असर पड़ता है।

फिल्म में एक और संदेश भी दिया गया है, जो यह है कि जीवन जीने की कोई उम्र नहीं होता है। इसीलिए, फिल्म में बूढ़े पात्र को अपने बुढ़ापे में भी जीवन का आनंद लेते हुए दिखाया गया है, जो पब में जा कर पार्टी करता है और और अपना जीवन एक जवान युवक की तरह जीता है यह संदेश यह है कि उम्र के साथ जीवन का आनंद लेना बंद नहीं करना चाहिए।

लेकिन फिल्म ने प्रदेश में अच्छा ओपनिंग किया है, जो इसकी एक बड़ी उपलब्धि है। लेकिन अगर आप इस फिल्म को देखने जा रहे हैं, तो आपको इसकी कमियों के बारे में पता होना चाहिए।

*रेटिंग:* 2./5

*सिफारिश:* अगर आप एक अच्छी प्रेम कहानी देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए नहीं है। लेकिन अगर आप एक सामान्य छत्तीसगढ़ी पारिवारिक सीजी फिल्म देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकती है।

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