बिलासपुर में अपराध बेलगाम हो चुका है। पिछले 24 घंटे में शहर की शांति को दो निर्मम हत्याओं ने तार-तार कर दिया है। एक हत्या दिन में सिविल लाइन थाना क्षेत्र में हुई, तो दूसरी रविवार तड़के करीब रात 1 बजे तेलीपारा इलाके में हुई, जहां एक युवक ने अपने ही चाचा को मौत के घाट उतार दिया।
पहली वारदात: सिविल लाइन में दिनदहाड़े खून
दिन मे सिविल लाइन क्षेत्र में एक व्यक्ति की हत्या ने शहर को दहला दिया। दिनदहाड़े हुई इस वारदात से यह सवाल उठ खड़ा हुआ कि आखिर पुलिस की ‘दिन गश्ती’ कहां थी? क्या अपराधी अब पुलिस की मौजूदगी को भी ठेंगा दिखाने लगे हैं?
दूसरी वारदात: तेलीपारा में आपसी रंजिश में सगे चाचा की हत्या
बीती रात तेलीपारा में पारिवारिक विवाद ने खून का रूप ले लिया। युवक ने अपने चाचा की बेरहमी से हत्या कर दी। यह वारदात करीब रात 1 बजे की है। बताया जा रहा है कि दोनों के बीच पुराने झगड़े की आग अभी तक बुझी नहीं थी, जो आखिरकार मौत तक पहुंच गई।
पुलिस की 'तत्परता' या अपराधियों की 'ताकत'?
लगातार दो हत्याएं यह बताने के लिए काफी हैं कि बिलासपुर में कानून व्यवस्था अब नाम मात्र की चीज़ बनकर रह गई है। न तो दिन में पुलिस की मौजूदगी अपराध रोक पा रही है, और न ही रात में उसकी ‘पेट्रोलिंग’ से डर पैदा हो रहा है।
क्या SSP सिर्फ प्रेस कॉन्फ्रेंस तक सीमित हैं?
हर हत्या के बाद वही घिसा-पिटा बयान: “जांच जारी है”, “जल्द गिरफ्तारी होगी” हालाकि इन दोनों मामलों के आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। लेकिन असल सवाल यह है – जुर्म कब रुकेगा?
क्या बिलासपुर अब हत्या और खूनखराबे का शहर बन गया है? क्या जनता अब अपनी सुरक्षा खुद करने को मजबूर होगी?
बिलासपुर पुलिस से जनता पूछ रही है – अगला नंबर किसका?
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