जनता से कटे दिलेश साहू का “Janaki भाग 1” — पुराने घाव, नई कोशिश, पर क्या अब चलेगी चाल?

 छत्तीसगढ़ फिल्म इंडस्ट्री के एक ऐसे अभिनेता की बात हो रही है, जो 10 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय कर चुका है, फिर भी पहचान के लिए आज भी मोहताज है। नाम है दिलेश साहू—एक ऐसा चेहरा जिसे पहचान दिलाने की हर कोशिश असफल रही। “मोर जोड़ीदार” से शुरू हुआ ये सफ़र, “रजनी” और “कृष्णा अनुज” तक आते-आते फ्लॉप की शृंखला बन चुका है।

अब दिलेश साहू अपनी नई फिल्म “Janaki भाग 1” के साथ लौट रहे हैं। प्रचार किया जा रहा है कि फिल्म महिला-प्रधान है, हर महिला के अंदर माँ जानकी बसती हैं—लेकिन ये संवेदनशील विषय क्या सिर्फ मार्केटिंग का हथियार बनकर रह जाएगा?

जब फ्लॉप्स के बाद भी नहीं बदली सोच...

दिलेश की 10 से अधिक फिल्में आईं, और लगभग सभी को जनता ने नकार दिया। “चल हट कोनों देख लेही” को छोड़ दें, तो बाकी फिल्मों का हाल वो रहा जिसे सिनेमा जगत में “डिजास्टर” कहा जाता है। इसके बावजूद हर बार वही टीम, वही निर्माता—जो अक्सर इनका भाई मोहित साहू ही होता है—भाई-भतीजावाद का खुला उदाहरण।

डबिंग से मिलेगा दर्शक? या फिर वही पुराना भ्रम?

फिल्म को पूरे देश में हिंदी डबिंग के साथ रिलीज़ करने की योजना है। डबिंग की कमान साउथ फिल्मों के डबिंग आर्टिस्ट संकेत ने संभाली है। लेकिन सवाल यह है—जिस एक्टर को छत्तीसगढ़ के लोग तक ठीक से नहीं जानते, उसका हिंदी डब फिल्म कौन देखेगा?

लोकल स्टार्स भी नहीं बने संजीवनी

दिलेश साहू को स्थापित करने के लिए पहले से मौजूद स्टार्स के साथ फिल्में बनाई गईं—मगर फिर भी परिणाम सिर्फ निराशा ही रहा। यानी इंडस्ट्री के प्रभावशाली नाम भी इस अभिनेता को ‘साल्व’ नहीं कर पाए।

“तू है कौन बे…” — धमकी, घमंड और सच्चाई से भागना

यही वो एक्टर हैं जिन्होंने जब सच्चाई उजागर की गई, तो सीधे धमकी दी। “तू है कौन बे” जैसे शब्दों से धमकाने की कोशिश की गई, व्हाट्सएप पर ब्लॉक किया गया। लेकिन उस समय छत्तीसगढ़ के कई पत्रकार और कलाकार साथ खड़े हुए, क्योंकि ये लड़ाई सिर्फ एक रिपोर्टर की नहीं, बल्कि पत्रकारिता की साख की थी।

ना नेता, ना मंच, ना प्रचार… तो हाइप कहाँ से आएगा?

17 अप्रैल को रायपुर के श्याम टॉकीज परिसर में इस फिल्म का ट्रेलर लॉन्च किया गया था। न कोई मंत्री, न कोई बड़ा नाम शामिल रहा। न ही कोई चर्चित डिजिटल प्लेटफॉर्म इसका प्रचार कर रहा है। पब्लिक रिव्यू भी साफ़ इशारा करता है—हर 20 में से 19 लोगों को दिलेश साहू का नाम तक नहीं पता।

अब जनता तय करेगी—सच्चाई के साथ या घमंड के साथ?

ये सिर्फ एक फिल्म की रिलीज़ नहीं, बल्कि सच्चाई बनाम झूठे स्टारडम की लड़ाई है। अब समय है कि जनता खुद फैसला करे—क्या वे उस घमंड के सामने झुकें जो पत्रकार को धमकाता है? या खड़े हों उस सच्चाई के साथ, जो बिना डरे, बिना बिके बोलती है?



अब फैसला आपके हाथ में है—CG इंडस्ट्री को आगे बढ़ाना है या भाई-भतीजावाद की बर्बादी को और वक्त देना है?

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