छत्तीसगढ़ी सिनेमा में इन दिनों दिलेश साहू की आने वाली फिल्म ‘जानकी भाग 1’ को लेकर एक दावा ज़ोर-शोर से फैलाया जा रहा है—कि ये CG फिल्म इंडस्ट्री की पहली हिंदी फिल्म है।
लेकिन ये दावा पूरी तरह भ्रामक, तथ्यहीन और एक सोची-समझी मार्केटिंग चाल है।
क्योंकि इससे पहले भी कई छत्तीसगढ़ी कलाकार हिंदी फिल्म बना चुके हैं—और बड़े स्तर पर रिलीज भी कर चुके हैं।
सबसे अहम नाम है अखिलेश पांडे, जिन्होंने:
‘कठोर’ जैसी हिंदी फिल्म बनाई, जिसमें बॉलीवुड के नामी कलाकारों ने काम किया और लगातार 12 शो चलने का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया।
इसके बाद ‘मैरेज में धमाल’ नाम की हिंदी फिल्म बनाई, जो आज भी OTT प्लेटफॉर्म्स पर स्ट्रीम हो रही है।
इनके अलावा "राम प्रसाद बिस्मिल" और "घर चलो ना पापा" जैसे हिन्दी फ़िल्में भी अखिलेश पांडे ने बनाया है।
तो अब सवाल उठता है—‘जानकी’ कैसे पहली फिल्म हो गई?
क्या दिलेश साहू जनता को गुमराह करना चाह रहे हैं?
या बस अपना झूठा इतिहास रचने की कोशिश कर रहे हैं?
इस तरह के झूठे दावे सिर्फ फिल्म के प्रमोशन के लिए किए जा रहे हैं ताकि असली मेहनत करने वाले कलाकारों और डायरेक्टर्स की उपलब्धियों को दबाया जा सके।
लेकिन अब दर्शक भी समझदार हैं और हर झूठ को एक्सपोज़ किया जाएगा।
बिलासपुर TIME सवाल पूछता है:
"क्या सिर्फ पैसा और प्रचार से इतिहास लिखा जा सकता है?
या फिर असली पहचान मेहनत और सच्चाई से मिलती है?"
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