“सितारा या साया? – जब पहचान का बोझ बन जाए फिल्मों की कतार फ्लॉप ऐक्टर का अखिल भारतीय सपना"

छत्तीसगढ़ फिल्म इंडस्ट्री में एक नाम है — दिलेश साहू।
नाम ऐसा, जिसे पब्लिक रिव्यू में 20 में से 19 लोग पहचान नहीं पाए।
और काम? काम इतना कि फिल्में गिनने में उंगलियाँ थक जाएँ, लेकिन सफलता?
बस एक – “चल हट कोनों देख लेही”, वो भी हिट नहीं, बस चर्चा में।

2018 से शुरू सफर, लगातार फ्लॉप्स का सिलसिला:

1. मोर जोड़ीदार

2. लव दीवाना

3. मोर जोड़ीदार 2

4. मैं दिया तैं मोर बाती

5. इश्क म रिस्क हे

6. चल हट कोनों देख लेही

7. रागिनी(डिजास्टर)

8. कुरुक्षेत्र

9. चंदा मामा (डिज़ास्टर)

10. भूख माया के(डिजास्टर)

11. रजनी(डिजास्टर)

12. मंतोरा(डिजास्टर)

13. कृष्णा अनुज(डिजास्टर)

इतना सब करने के बाद भी पहचान के लिए मोहताज रहना कोई आसान बात नहीं।
लेकिन असली बात यहाँ खत्म नहीं होती।

भाई भतीजावाद का चटक नमूना:

इस ‘सितारे’ की फिल्मों के अधिकतर प्रोड्यूसर इसके अपने ही भाई होते हैं।
मतलब – फिल्म नहीं, फैमिली प्रोजेक्ट चल रहा है।
फ्लॉप हो या डिजास्टर, फाइनेंस की टेंशन नहीं।
और फिर भी हिम्मत ऐसी कि खुद को एक्शन स्टार कहलवाते हैं।

कभी जेल, कभी धमकी:

सूत्र बताते हैं कि एक फिल्म की शूटिंग के दौरान दिलेश साहू पर एफआईआर भी हुई थी, और जेल यात्रा भी।
इतना ही नहीं, जब पिछली रिपोर्ट प्रकाशित हुई,
तो मुझे — एक पत्रकार को — इस व्यक्ति ने “तू है कौन होता है मेरे बारे मे लिखने वाला? और अभद्रता” जैसी भाषा के साथ धमकी दी।
लेकिन मैं चुप नहीं रहा।
छत्तीसगढ़ फिल्म इंडस्ट्री के कुछ सच्चे लोग और पत्रकार साथी मेरे साथ खड़े हुए।
क्योंकि मुद्दा अब किसी एक का नहीं था — मुद्दा था सच्चाई का गला घोंटने की कोशिश का।

अब सवाल ये है...

जब CG के दर्शक ही इस नाम से अनजान हैं,
तो ये नया फिल्म “जानकी भाग 1”, जिसे पूरे देश में हिंदी डबिंग के साथ रिलीज़ किया जा रहा है —
क्या उसका कोई वाजिब औचित्य है?

क्या सिर्फ घमंड और ज़िद्द से सिनेमा चलाया जा सकता है?
क्या CG इंडस्ट्री की पहचान ऐसे कलाकारों के भरोसे बनाई जा सकती है,
जिनके अभिनय, डांस और एक्शन तीनों ही सवालों के घेरे में हैं?

अब जवाब दर्शकों को देना है — और सवाल पत्रकार पूछते रहेंगे।
धमकी से नहीं डरेंगे — क्योंकि कलम की धार बंदूक से तेज होती है।

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