बिलासपुर टाइम | सूत्रों के हवाले से
बिलासपुर का सिरगिट्टी थाना क्षेत्र नशे के दलदल में बुरी तरह धंसता जा रहा है। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस दलदल में खुद वर्दीधारी ही शामिल बताए जा रहे हैं! सूत्रों के अनुसार, कोनी थाना में पहले तैनात रहे एक विवादित आरक्षक, जो वर्तमान में सिरगिट्टी थाने में पदस्थ है, नशे के कारोबारियों के लिए 'लोकल कनेक्शन' बन गया है।
अपने ही गांव में तैनाती — इत्तेफाक या सेटिंग?
सूत्रों का दावा है कि उक्त आरक्षक का गृहग्राम भी सिरगिट्टी थाना क्षेत्र में ही आता है। और यहीं से उसकी "नेटवर्किंग" शुरू होती है। गांव के जान-पहचान वाले, पुराना संपर्क और अब वर्दी—इन तीनों का मिलाजुला प्रयोग कर वो नशे के गोरखधंधे को खुली छूट दे रहा है।
सूत्रों की मानें तो:
नशे के सौदागरों से हर महीने 'हफ्ता' वसूली होती है।
पुलिस रेड की भनक पहले ही ‘भीतरखाने’ पहुंचा दी जाती है।
कुछ संदिग्ध ठिकानों तक थाने से ‘संकेत’ भी भेजे जाते हैं।
तस्करों को पकड़ कर छोड़ने का खेल आम बात हो गई है।
थाना प्रभारी की चुप्पी — मूक समर्थन या मजबूरी?
थाना प्रभारी रजनीश सिंह पूरे मामले में अब तक चुप हैं। उनकी यह चुप्पी क्या विभागीय मर्यादा है, या मौन सहमति? यह सवाल क्षेत्र में उठ रहा है।
जांच में रहा है विवादों में — लेकिन कार्रवाई नहीं!
जिस आरक्षक पर ये गंभीर आरोप हैं, उसी के खिलाफ कोनी थाना कार्यकाल के दौरान विभागीय जांच भी बैठाई गई थी। लेकिन नतीजा? आज वो सिरगिट्टी में पदस्थ है और "नशे का लोकल नेटवर्क" मज़बूत कर रहा है।
एसपी की मुहिम को लग रहा धक्का
जब जिले के पुलिस अधीक्षक बिलासपुर को नशा मुक्त बनाने की कोशिशों में लगे हैं, तब उन्हीं की फोर्स के कुछ हिस्सों में यह सड़ांध सवाल खड़े करती है।
जनता का फूटा गुस्सा — “रखवाले बन बैठे हैं सौदागरों के साझेदार”
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित आरक्षक अपने गांव में अब वर्दी में गुंडई कर रहा है। उन्होंने मांग की है कि उसकी पोस्टिंग तत्काल हटाई जाए और स्वतंत्र जांच कराई जाए।
अब देखना यह है कि क्या पुलिस महकमा अपने ही सिस्टम में पनप रही इस गंदगी को साफ करेगा, या फिर यह मामला भी ‘सूत्रों’ तक ही सिमट कर रह जाएगा?
खबर के साथ बने रहें — अगले एपिसोड में नाम के साथ उजागर करेंगे!
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