तोरवा थाना क्षेत्र में पुलिस की नाकामी: आधी रात तक खुले रहते हैं होटल और पान ठेले

तोरवा थाना क्षेत्र में पुलिस की नाकामी स्पष्ट दिखाई दे रही है। आधी रात तक होटल और पान ठेले खुले रहते हैं, जिससे नशेड़ियों का जमावड़ा होता है और लड़ाई-झगड़े की घटनाएं आम हो गई हैं।

प्रशासन का डर अब लोगों में नहीं रहा है, और पुलिस का सायरन बजते रहने के बावजूद किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता। होटल वाले एक लाइट तक बंद नहीं करते, जिससे साफ पता चलता है कि पुलिस का भय अब लोगों में नहीं रहा।

यह सवाल उठता है कि तोरवा थाने की नाकामी क्यों है? क्यों लोगों में पुलिस का भय खत्म हो गया है? निश्चित समय से पहले होटल संचालक होटलों को बंद क्यों नहीं करते?

अगर किसी दिन कोई बड़ी घटना घट जाती है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या पुलिस और प्रशासन किसी बड़ी घटना के इंतजार में हैं?

इसके अलावा, तोरवा पुलिस की कार्रवाई में भेदभाव दिखाई दे रहा है। कुछ क्षेत्रों में कार्रवाई नहीं होती, जबकि अन्य क्षेत्रों में पुलिस थोड़ी देर लेट होने पर भी कार्रवाई करती है। यह कैसी न्याय है?

क्या यही है सबके लिए कानून? अगर कार्रवाई हो रही है, तो सभी के ऊपर होनी चाहिए या सभी को छूट मिलनी चाहिए?

प्रशासन को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए और तोरवा क्षेत्र में शांति कायम करनी चाहिए। लोगों की सुरक्षा और सम्मान के लिए यह आवश्यक है।

कुछ प्रश्न जो प्रशासन को जवाब देने होंगे:

- क्या पुलिस थाने में पर्याप्त स्टाफ है?
- क्या पुलिस के पास आवश्यक संसाधन हैं?
- क्या प्रशासन ने तोरवा क्षेत्र में शांति कायम करने के लिए कोई योजना बनाई है?
- क्या पुलिस और प्रशासन किसी बड़ी घटना के इंतजार में हैं?

यह समय है कि प्रशासन और पुलिस मिलकर तोरवा क्षेत्र में शांति कायम करें और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।

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