20 दिसंबर को छत्तीसगढ़ के सिनेमाघरों में दो फिल्में एक साथ रिलीज होने वाली हैं - तीन टप्पर और डार्लिंग प्यार झुकता नहीं पार्ट 2। दोनों फिल्मों के हीरो अमलेश नागेश हैं, लेकिन प्रोड्यूसर और डायरेक्टर अलग-अलग हैं।
टीना टप्पर के डायरेक्टर प्रणव झा हैं, जिनको डायरेक्शन और पब्लिक की पसंद का काफी ज्ञान है और अनुभव भी है। वहीं, डार्लिंग प्यार झुकता नहीं पार्ट 2 के डायरेक्टर और प्रोड्यूसर भारती वर्मा हैं, जिनका अभी डायरेक्शन में बहुत ज्यादा अनुभव नहीं है।
अब सवाल यह उठता है कि क्या एक साथ दो फिल्मों की रिलीज से दोनों फिल्मों को नुकसान होगा या दर्शक दोनों फिल्मों को प्यार देंगे?
छत्तीसगढ़ में सिनेमाघरों की संख्या सीमित है और अधिकतर सिनेमा हॉल गाँव-कस्बा से दूर हैं। ऐसे में दर्शकों के पास समय और पैसा दोनों सीमित हैं। अगर दर्शक एक फिल्म देखने जाएंगे, तो दूसरी फिल्म को देखने के लिए उन्हें दोबारा समय और पैसा खर्च करना होगा।
इसलिए, यह सवाल उठता है कि क्या दर्शक दोनों फिल्मों को देखने के लिए इतना समय और पैसा खर्च करेंगे? या फिर वे एक फिल्म को देखने के बाद दूसरी फिल्म का इंतजार ओटीटी प्लेटफॉर्म पर करेंगे?
इस सवाल का जवाब तो वक्त ही देगा, लेकिन यह तय है कि एक साथ दो फिल्मों की रिलीज से दोनों फिल्मों के प्रोड्यूसर और डायरेक्टर के लिए चुनौती बढ़ जाएगी।
अब देखना यह होगा कि कौन सी फिल्म दर्शकों का दिल जीत पाएगी - टीना टप्पर या डार्लिंग प्यार झुकता नहीं पार्ट 2? क्या प्रणव झा का अनुभव और डायरेक्शन का ज्ञान तीन टप्पर को आगे बढ़ा पाएगा? या फिर भारती वर्मा की सोच और डायरेक्शन डार्लिंग प्यार झुकता नहीं पार्ट 2 को सफलता की ओर ले जाएगी?
लेकिन आखिर मेकर की क्या मानसिकता है? वे फिल्में आगे पीछे क्यों नहीं करना चाहते है? क्या कारण है अगर हीरो अलग अलग होते तो एक साथ कई फिल्में रिलीज हुई है, लेकिन हीरो एक ही है तो क्या भारती वर्मा और प्रणव झा के बीच कोई मनमुटाव है या कम्पीटिशन है? क्या यह एक साथ रिलीज की रणनीति है या फिर कुछ और?
जो भी हो, यह तय है कि छत्तीसगढ़ फिल्म इंडस्ट्री में एक साथ दो फिल्मों की रिलीज से दर्शकों को एक नई और रोमांचक फिल्मी अनुभव मिलेगा।
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