फ़िल्म "सुकवा" की कहानी दक्षिण भारतीय फ़िल्म "ब्लफ मास्टर" से मिलती-जुलती है, लेकिन मनोज वर्मा ने भूत प्रेत दिखाकर इसे अपने तरीके से पेश किया है। फ़िल्म की कहानी में भूत और इंसान के बीच का संबंध दिखाया गया है, जो थोड़ा अजीब लग सकता है.
फ़िल्म के लीड मन और दीक्षा का अभिनय बहुत शानदार है, जो अपने किरदार के साथ इंसाफ़ करते नज़र आए हैं। उनकी ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री दर्शकों को आकर्षित करती है।
फ़िल्म की शुरुआत में हीरो और हीरोइन का इंट्रो कमजोर है, जो दर्शकों को आकर्षित नहीं कर पाता है। स्क्रीनप्ले भी थोड़ा स्लो है, जो दर्शकों को बोर कर सकता है। तीनों कॉमेडियन ओवर एक्टिंग करते नजर आते हैं, जो फ़िल्म की कमजोरी है।
मेकअप और वीएफएक्स का काम भी कमजोर है, जो फ़िल्म की गुणवत्ता को कम करता है। फ़िल्म में गांव में हो रहे धोखाधड़ी पर फोकस किया गया है, जो एक अच्छा विषय है, लेकिन इसको और भी अच्छे से दिखाया जा सकता था।
फ़िल्म के गाने भी दर्शकों को बोर कर सकते हैं, क्योंकि इसमें ७ गाने हैं जो थोड़े ज्यादा हैं। हीरोइन की सौतेली माँ की कहानी भी थोड़ी कमजोर है, जो दर्शकों को आकर्षित नहीं कर पाती है।
लेकिन फ़िल्म की कहानी नया और अनोखा है, जो सीजी फ़िल्म इंडस्ट्री में एक अच्छा प्रयास है। मनोज वर्मा ने इस फ़िल्म को अपने तरीके से बनाया है, जो दर्शकों को आकर्षित कर सकता है।
अंत में, मैं कह सकता हूँ कि "सुकवा" एक अच्छी फ़िल्म है, लेकिन इसमें कुछ कमियाँ भी हैं। दर्शकों को यह फ़िल्म देखनी चाहिए, लेकिन उन्हें इसकी कमियों को भी ध्यान में रखना चाहिए।
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