"फ़िल्म हिट होने पर हॉस्पिटल खोलने का वादा: क्या यह पब्लिसिटी स्टंट है या सच्ची मंशा?"



सीजी फ़िल्म इंडस्ट्री में एक बड़ा अनाउंस हुआ है, जिसमें १९ तारीख़ को प्रदेश के सिनेमाघरों में रिलीज़ होने वाली फ़िल्म डोली लेके आजा के मेकर्स ने एक अजीब बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि अगर फ़िल्म हिट होती है, तो उस पैसे से एक हॉस्पिटल खोला जाएगा, जिसमें मध्यम वर्ग के लोगों का इलाज किया जाएगा।

यह बयान कई सवाल उठाता है। अगर हॉस्पिटल खोलना ही था, तो फ़िल्म क्यों बनायी गई? जो पैसे फ़िल्म निर्माण में लगाए गए हैं, उसी से हॉस्पिटल खोला जा सकता था। क्या फ़िल्म मेकर्स लोगों को बेवक़ूफ़ समझ रहे हैं?

यह बयान कई लोगों को आश्चर्यचकित कर रहा है। अगर हॉस्पिटल खोलकर गरीबों की सेवा करनी ही थी, तो फ़िल्म हिट या फ्लॉप का क्या मतलब है? यह बयान फ़िल्म मेकर्स की मंशा पर सवाल उठाता है।

फ़िल्म की सफलता के लिए यह बयान एक भ्रमित करने वाला तरीका है। फ़िल्म की स्टोरी, स्क्रीनप्ले, डायरेक्शन, कलाकारों के अभिनय में दम रहा तो फ़िल्म हिट होगी, ना कि ऐसे भ्रमित करने वाले बयानों से।

यह बयान फ़िल्म मेकर्स की कमजोरी को दर्शाता है। अगर वे अपनी फ़िल्म की सफलता के लिए इतने आश्वस्त हैं, तो उन्हें अपनी फ़िल्म की गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए, ना कि ऐसे भ्रमित करने वाले बयानों पर।

इस मामले में लोगों को सोचना चाहिए कि क्या यह बयान महज़ एक पब्लिसिटी स्टंट है या फ़िल्म मेकर्स की सच्ची मंशा है। अगर यह बयान सच्चा है, तो यह एक अच्छा कदम होगा, लेकिन अगर यह महज़ एक पब्लिसिटी स्टंट है, तो यह लोगों को बेवक़ूफ़ बनाने का एक तरीका होगा।

इस विषय पर हमें सोचना चाहिए कि क्या हमें ऐसे बयानों को गंभीरता से लेना चाहिए या नहीं। क्या हमें फ़िल्म मेकर्स की मंशा पर सवाल उठाना चाहिए या नहीं। इन सवालों का जवाब हमें खुद ही ढूंढना होगा।

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