फ़िल्म डोली लेके आजा के प्रोडूसर ने एक अजीब बयान दिया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि अगर उनकी फ़िल्म हिट या सुपर हिट होती है, तो वे उसी पैसे से हॉस्पिटल बनवायेंगे। यह बयान कई सवाल खड़े करता है, जैसे कि क्या प्रोडूसर के पास हॉस्पिटल बनाने के लिए आवश्यक अनुमतियों और दस्तावेजों की व्यवस्था है? क्या उन्होंने हॉस्पिटल बनाने के लिए कोई योजना बनाई है? और सबसे महत्वपूर्ण बात, क्या उन्होंने हॉस्पिटल बनाने के लिए आवश्यक पैसे की व्यवस्था की है?
यह बयान कई लोगों को संदेहास्पद लगता है, क्योंकि यह फ़िल्म की सफलता के साथ जोड़ा गया है। अगर फ़िल्म की कहानी, स्क्रीनप्ले, कलाकारों के अभिनय, और म्यूजिक अच्छी होगी, तो फ़िल्म हिट होगी, लोगों को भ्रमित करने वाले बयानों से नहीं।
इसके अलावा, कई लोगों का कहना है कि फ़िल्म मेकर्स द्वारा लगातार समाज विशेष की धार्मिक संस्थाओं तक जाकर फ़िल्म के लिए मनोकामनाए माँगा जा रहा है, लेकिन प्रदेश में और भी कई धार्मिक स्थान हैं जहां जाना उचित नहीं समझा गया है। आखिर क्या वजह है कि अन्य धार्मिक स्थलों में जाकर भी फ़िल्म के लिए मनोकामना लेनी चाहिए जिससे फ़िल्म को सफलता मिले?
यह सवाल उठता है कि क्या यह वादा वास्तव में दर्शकों को आकर्षित करेगा? क्या यह फिल्म उद्योग के लिए अच्छा है? इन सवालों के जवाब में यही कहा जा सकता है कि समय ही बताएगा कि यह प्रलोभन कितना सफल होगा।
क्या प्रोडूसर इस वादे को लिखित में देने को तैयार है? और क्या दायरा है हॉस्पिटल का? ये कौन से हॉस्पिटल होंगे? कैंसर का, एक्सीडेंट का, या सभी बीमारी का इलाज होगा? क्या प्रोडूसर का यह कॉन्सेप्ट क्लियर है? वादे तो बहुत होते हैं, लेकिन पूरे कितने होते हैं? यह सवाल अभी भी अनुत्तरित है।
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