टीना टप्पर एक ऐसी फ़िल्म है जो आपको बहुत ज़्यादा निराश कर देगी। फ़िल्म की कहानी में कुछ दम नहीं है, यह एक पुरानी और घिसी पिटी लव स्टोरी है जो सदियों से चली आ रही है। लड़का लड़की को देखता है, फिर उसे कैसे पटाऊ सोचता है और विभिन्न पैतरे आजमाता है।
फ़िल्म में हीरो का एक आलू गुंडा का दुकान है, जो बहुत फेमस है, हर दूसरे मिनट में आलूगुण्डा का तारीफ़ एक मिनट के लिए ऐसा लगता है की फ़िल्म आलू गुंडा के ही ऊपर बना है। लेकिन यह फ़िल्म की कहानी को आगे बढ़ाने में मदद नहीं करता है। थाना प्रभारी के एरिया में मर्डर जैसे गंभीर वारदात होते हैं, लेकिन थाना प्रभारी रास्ते में आलू गुंडा खाने रुक जाता है और फिर उस विषय पर दोबारा कहीं भी कोई जिक्र नहीं होता है।
कुछ यूट्यूबर्स को फ़िल्म में काम देने के नाम पर सिर्फ़ झुनझुना दिया गया है, उनका फ़िल्म में होना नहीं दोनों एक ही बात है
फ़िल्म के निर्देशक प्रणव झा के पास ना साधन सुविधा की कमी और ना पैसे की कमी है उसके बावजूद इतना बकवास फ़िल्म बनाया है। संगीत में दम नहीं है, सिर्फ़ एक गाने का लिरिक्स लोगो को याद है, बाक़ी गाने के नाम पर कुछ भी बना कर परोस दिए हैं।
सायद यही कारण है की बीच में कुछ दर्शक सिनेमाहाल से बाहर निकल गए।
फ़िल्म के मुख्य किरदार का अभिनय में कुछ बदलाव ही नहीं है, वही कर रहा है जो यूट्यूब में करता है। हीरोइन के बारे में बात करने लायक कुछ नहीं है।
मेरी राय में फ़िल्म टोटल टाइम और पैसा का वेस्ट है। अगर आप अपने आप को टॉर्चर नहीं करना चाहते हो तो इस फ़िल्म से 8-10 किलोमीटर दूर रहें। यह फ़िल्म आपको निराश कर देगी, इसलिए इसे देखने से पहले सोच लें।
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