"क्या हम बेवक़ूफ़ बन रहे हैं? सीजी फ़िल्म इंडस्ट्री में सिक्वल की बीमारी"

सीजी फ़िल्म इंडस्ट्री में एक नई बीमारी फैल रही है - सिक्वल की बीमारी। मोर छैंहा भुईंया के बाद अब इसका तीसरा पार्ट आने वाला है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सिक्वल की बीमारी हमें बेवक़ूफ़ बना रही है?

बॉलीवुड में भी सिक्वल की बीमारी फैली हुई है, लेकिन वहाँ पर कम से कम बड़े बजट और अच्छे निर्देशकों के साथ फ़िल्में बनाई जाती हैं। लेकिन सीजी फ़िल्म इंडस्ट्री में ऐसा नहीं है। यहाँ पर सिक्वल की बीमारी ने फ़िल्म इंडस्ट्री को पूरी तरह से अपने कब्जे में ले लिया है।

क्या हम दर्शक बेवक़ूफ़ बन रहे हैं? क्या हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि हमें क्या दिखाया जा रहा है? क्या हमें यह नहीं समझना चाहिए कि सिक्वल की बीमारी हमें केवल और केवल पैसे कमाने के लिए बनाई गई है?

यह सवाल हमें सोचने पर मजबूर करते हैं कि क्या हम वास्तव में बेवक़ूफ़ बन रहे हैं? क्या हमें यह नहीं समझना चाहिए कि सीजी फ़िल्म इंडस्ट्री में सिक्वल की बीमारी एक बड़ा खतरा है जो हमें बेवक़ूफ़ बना रही है?

यह समय है कि हम दर्शक जागृत हों और यह समझें कि हमें क्या दिखाया जा रहा है। यह समय है कि हम सीजी फ़िल्म इंडस्ट्री में सिक्वल की बीमारी के खिलाफ आवाज उठाएं।

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