बिलासपुर TIME |
छत्तीसगढ़ का कभी शांत शहर कहे जाने वाला बिलासपुर आज अपराध, भय और नशे के जहर में बुरी तरह डूबता जा रहा है। बीते कुछ महीनों में जिस तरह अपराधों में बढ़ोतरी हुई है—दिनदहाड़े हत्याएं, चाकूबाजी, लूट—उसकी जड़ में जाकर जब आम लोगों से बात की गई, तो हर उंगली एक ही दिशा में उठी: नशा।
नशा: अपराध की जड़, शहर की तबाही का कारण
आम नागरिकों का साफ कहना है कि नशा ही अपराध को जन्म दे रहा है। हर गली, हर मोहल्ले में मेडिकल ड्रग्स का खुला व्यापार चल रहा है। लड़के-लड़कियां, नाबालिग बच्चे तक अब टैबलेट्स, सिरप और इंजेक्शन जैसे मेडिकल नशे की गिरफ्त में हैं। और ये सब ‘कंट्रोल्ड’ केटेगरी की दवाएं होने के बावजूद खुलेआम बिक रही हैं।
पुलिस का ‘कंट्रोल’ सिर्फ कागजों में?
बिलासपुर पुलिस जब भी नशे के खिलाफ कार्रवाई की बात करती है, तो ज्यादातर उसके रिकॉर्ड में सिर्फ महुआ, देशी शराब और दो-चार अवैध पाउच की ज़ब्ती होती है। लेकिन सवाल ये है—क्या मेडिकल नशा इस शहर में दिखाई नहीं देता? क्या पुलिस को इन मेडिकल नशा बेचने वाले नेटवर्क की भनक नहीं?
युवा पीढ़ी बर्बादी के रास्ते पर
बिलासपुर की सबसे बड़ी विडंबना यही है कि यहां की नई पीढ़ी नशे के सबसे खतरनाक चरण में प्रवेश कर चुकी है। न सिर्फ छात्र, बल्कि बेरोजगार युवा और कई मामलों में स्कूल जाने वाले बच्चे भी अब इंजेक्शन व टैबलेट्स की लत में हैं। इससे उनका मानसिक संतुलन बिगड़ रहा है, और यही असंतुलन कई बार उन्हें अपराध की ओर धकेल रहा है।
शहर की छवि धूमिल, जनता में डर
जहां पुलिस को अपराध और नशे पर नियंत्रण रखना चाहिए, वहीं आज शहर के कई हिस्से पुलिस की गश्त से ज्यादा नशे की आवाजों से गूंज रहे हैं। आम लोग अब अपने बच्चों को अकेले बाहर भेजने से डरते हैं। मोहल्लों में भय है, गली-कूचों में असुरक्षा, और प्रशासन है कि नींद में है।
प्रशासन के सामने सवाल, जवाब कौन देगा?
1. मेडिकल नशे के कारोबार पर पुलिस कब सख्ती करेगी?
2. क्या सिर्फ देसी शराब पकड़ने से पुलिस अपनी ज़िम्मेदारी पूरी मान रही है?
3. जब मेडिकल नशा सरकारी लाइसेंस की दुकानों से बिक रहा है, तो कार्रवाई क्यों नहीं?
4. और सबसे अहम—क्या बिलासपुर अब नशे और अपराध का अड्डा बन चुका है?
निष्कर्ष:
बिलासपुर को अब जरूरत है सिर्फ पुलिसिंग की नहीं—जागरूकता, ईमानदारी और ज़मीनी कार्रवाई की। जब तक मेडिकल नशे के खिलाफ अभियान नहीं छेड़ा जाएगा, तब तक यहां के अपराधियों को रोकना नामुमकिन है। और अगर अब भी पुलिस नहीं जागी, तो अगला अपराध किस मोहल्ले में होगा—ये कहना मुश्किल नहीं, बस डरावना होगा।
0 Comments