ईमानदारी की सज़ा? दुर्ग एसपी जितेंद्र शुक्ला का लूप लाइन में ट्रांसफर, सवालों में सरकार की मंशा

छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार को बने डेढ़ साल से ज़्यादा हो चुके हैं, लेकिन अब भी कांग्रेस कार्यकाल के भ्रष्ट अधिकारियों पर सरकार की मेहरबानी खत्म होती नहीं दिख रही। हाल ही में जारी हुए IAS और IPS अफसरों की तबादला सूची ने यह साफ कर दिया है कि सरकार को ईमानदार अधिकारी नहीं, बल्कि ‘अनुकूल’ अधिकारी ही पसंद हैं।

इस सूची में सबसे चौंकाने वाला नाम है दुर्ग एसपी जितेंद्र शुक्ला का, जिनका तबादला एक बार फिर लूप लाइन में कर दिया गया है। जानकारों के अनुसार, एसपी शुक्ला ने अपने एक साल के कार्यकाल में दुर्ग को क्राइम और करप्शन से काफी हद तक राहत दिलाई थी। उन्होंने न केवल अपराधों पर काबू पाया बल्कि कई भ्रष्ट पुलिसकर्मियों और अधिकारियों को सस्पेंड कर ईमानदारी की मिसाल पेश की।

लेकिन लगता है कि यही ईमानदारी सरकार को रास नहीं आई।

सरकार के इस फैसले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या छत्तीसगढ़ में ईमानदार अफसरों के लिए कोई जगह नहीं बची है? क्या भ्रष्टाचार पर चोट करना अब सज़ा पाने का कारण बन गया है? वहीं, इस सूची में कई ऐसे अधिकारियों को महत्वपूर्ण पद सौंपे गए हैं। इससे सरकार की कथनी और करनी के बीच फर्क साफ झलकता है।

जानकारों का कहना है कि अगर सरकार इसी तरह ईमानदार अफसरों को लूप लाइन पर भेजती रही, तो प्रशासनिक तंत्र में हताशा और भय का माहौल बनेगा। सवाल यह भी है कि क्या छत्तीसगढ़ की जनता ने इसी बदलाव के लिए वोट दिया था?

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