"5140 लोगों पर 50 करोड़ का मानहानि दावा? मोहित साहू की धमकी या ध्यान भटकाने का ड्रामा!"

छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री के एक कथित निर्माता-निर्देशक मोहित साहू पर टिप्पणी करने वाले 5140 लोगों पर मानहानि का दावा ठोकने की घोषणा सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। पोस्ट के अनुसार, साहू हर ब्लॉगर, यूट्यूबर, फिल्म समीक्षक, डीओपी, एक्टर — जो उनके ऊपर "अभद्र टिप्पणी" कर चुके हैं — उन पर ₹50 करोड़ से अधिक का मानहानि केस करने की तैयारी में हैं।



फैक्ट-चेक और कानूनी विश्लेषण:

1. क्या 5140 लोगों पर मानहानि केस संभव है?

व्यवहारिक रूप से असंभव।

प्रत्येक व्यक्ति पर अलग-अलग मुकदमा दायर करना पड़ेगा।

सभी के खिलाफ साक्ष्य (screenshots, वीडियो, timestamps) देने होंगे।

मानहानि का दावा तब ही मान्य है जब:

टिप्पणी झूठी, हानिकारक और असत्यापित हो।

किसी की प्रतिष्ठा को जानबूझकर नुक़सान पहुँचाया गया हो।


2. खर्च और व्यावहारिकता का गणित:
 
मोहित साहू यदि वास्तव में 5140 लोगों पर 50 करोड़ रुपये की मानहानि का दावा करते हैं, तो उन्हें अदालत में सिर्फ दावा करने के लिए भी बड़ी रकम खर्च करनी होगी:
 
मानहानि शुल्क 
50 करोड़ रुपये के दावे पर 5% तक कोर्ट फीस देनी होती है, यानी लगभग 2.5 करोड़ रुपये। 
 
स्टाम्प शुल्क 
इसके अतिरिक्त 1% स्टाम्प शुल्क देना अनिवार्य है, यानी 50 लाख रुपये और जुड़ जाते हैं।
 
नोटिस भेजने का खर्च:
 यदि हर व्यक्ति को नोटिस भेजने का औसतन खर्च 2000 रुपये माना जाए तो 5140 लोगों के लिए 1 करोड़ 2 लाख 80 हजार रुपये का अलग से खर्च आएगा।
 
कुल अनुमानित खर्च:
 
करीब 4 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सिर्फ एक मुकदमे की औपचारिकता पूरी करने में खर्च करनी होगी — वो भी तब जब अदालत इसे सुनवाई के योग्य माने।




प्रत्येक केस की सम्भावित लागत: ₹20,000 से ₹1 लाख (वकील, दस्तावेज़, कोर्ट फ़ीस,अन्य खर्च)

कुल संभावित लागत: ₹25,000 × 5140 = ₹12.85 करोड़ से अधिक

क्या मोहित साहू के पास ये राशि है?


3. सोशल मीडिया टिप्पणी मानहानि नहीं होती अगर...

कोई टिप्पणी सत्य, तथ्य आधारित आलोचना या निजी राय हो।

सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, सार्वजनिक व्यक्ति (Public Figure) को आलोचना सहनी होगी जब तक वह व्यक्तिगत अपमान या पूर्ण झूठ न हो।



माना जाए तो क्या होगा?

5140 लोगों को अलग-अलग कोर्ट नोटिस भेजने होंगे।

केस की प्रक्रिया सालों तक खिंच सकती है।

कई केस खारिज भी हो सकते हैं, जिससे मोहित साहू की फजीहत होगी।

कोर्ट यह भी पूछ सकती है कि यदि आप Public Figure हैं तो आलोचना से इतनी परेशानी क्यों?




इस घोषणा का असली मकसद क्या हो सकता है?

लोगों को डराना, ताकि वे उनके खिलाफ बोलना बंद करें।

अपनी फिल्म या नाम का प्रचार करना — क्योंकि विवाद का मतलब है चर्चा।

नुकसान हुई प्रतिष्ठा को जबरदस्ती न्यायिक हथियार से बचाने की कोशिश।



अंतिम टिप्पणी (जर्नलिस्ट व्यू):

मोहित साहू का यह "एक्शन मोड" की धमकी न केवल हास्यास्पद है, बल्कि यह लोकतांत्रिक आलोचना की आज़ादी पर हमला है। सोशल मीडिया पर उठ रही आवाज़ें यदि झूठ नहीं हैं, तो उन्हें दबाने के लिए ₹50 करोड़ के झूठे दावे करना खुद को और हास्यास्पद बनाना है। यह रणनीति उल्टी पड़ सकती है — जनता डरने वाली नहीं है।

नोट: इस खबर में प्रस्तुत खर्च का गणना संभावित है, जो एक कानूनी सलाहकार से प्राप्त जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। कोर्ट फीस, स्टाम्प शुल्क और नोटिस खर्च जैसे आँकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि बिलासपुर TIME द्वारा नहीं की गई है।

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