बिलासपुर टाइम एक्सक्लूसिव |
जिस अफसर की गर्दन हमेशा ऊँची रही, आज उसी का सिर झुक गया। तेज़तर्रार छवि और विवादों के पर्याय बन चुके पुलिस निरीक्षक कलीम खान को आईजी संजीव शुक्ला ने उनके ओहदे से नीचे गिरा दिया है। महिला शोषण और रकम की डिमांड जैसे संगीन आरोपों में दोषी पाए जाने के बाद, उन्हें इंस्पेक्टर से सीधा सब-इंस्पेक्टर बना दिया गया। यह सिर्फ एक सज़ा नहीं, पुलिस विभाग के इतिहास में एक सबक है।
कलीम खान, जो चकरभाठा, सिविल लाइन और तारबाहर जैसे अहम थानों में तैनात रह चुके हैं, हमेशा चर्चा में रहे – मगर काबिलियत से ज़्यादा अपने अहंकारी व्यवहार और विवादित फैसलों के चलते। उन पर पहले भी कई शिकायतें हुई थीं – कुछ तो सीधे डीजीपी के दरवाज़े तक जा पहुंचीं थीं, लेकिन इस बार वक्त ने उनसे रैंक छीन ली।
सूत्रों के मुताबिक, एक महिला द्वारा लगाए गए शोषण के आरोप के बाद जांच बैठाई गई थी। जांच में दोषी ठहराते हुए, आईजी ने ज़ीरो टॉलरेंस नीति के तहत ये कड़ा फैसला लिया।
पुलिसवालों के लिए ये सिर्फ खबर नहीं, चेतावनी है!
अब चाहे खाकी की वर्दी हो या कांस्टेबल से लेकर कप्तान तक की कुर्सी – अगर आप जनता को डराने, शोषण करने या सत्ता का गलत इस्तेमाल करने का सोच रहे हैं, तो संभल जाइए। ये दौर बदला है – यहां पद नहीं, परफॉर्मेंस और नैतिकता चलेगी।
बिलासपुर टाइम पूछता है –
> "जब जनता आपके भरोसे पर जिए, तो आप उनके भरोसे का गला क्यों घोंटते हो?"
"कलीम खान जैसे अफसर अगर वर्दी की लाज नहीं रख सकते, तो उन्हें उसका बोझ भी नहीं उठाना चाहिए।"
आईजी का यह फैसला उन ईमानदार पुलिस अफसरों के लिए प्रेरणा है, जो वर्दी को इज़्ज़त देते हैं। और जो वर्दी को धौंस का ज़रिया बनाते हैं – अब तुम्हारा भी नंबर आएगा।
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