बिलासपुर। शहर का प्रशासन क्या अब सिर्फ कमजोर और ग़रीब तबके पर क़ानून चलाने तक सीमित रह गया है? यह सवाल अब हर जागरूक नागरिक के मन में उठने लगा है। निगम प्रशासन द्वारा हाल ही में ठेला-गुमटी वालों को चौक-चौराहों से हटाया गया, ये कहते हुए कि "शहर में यातायात की समस्या बढ़ रही है", लेकिन क्या वाकई यही लोग ट्रैफिक जाम के लिए जिम्मेदार हैं, या फिर असली वजह को नजरअंदाज किया जा रहा है?
गांधी चौक से शिव टॉकीज चौक तक तानाशाही चुप्पी
शहर के सबसे व्यस्त मार्ग गांधी चौक से लेकर शिव टॉकीज चौक तक रोजाना घंटों जाम की स्थिति बनी रहती है। राजीव प्लाजा के दोनों तरफ आधी सड़क तक रसूखदारों की गाड़ियाँ पार्क की जाती हैं। इससे ट्रैफिक पुलिस और नगर निगम की आंखों के सामने आम जनता फँसी रहती है – लेकिन कार्रवाई? "शून्य"।
बजरंग चाय वाला बना VIP स्पॉट, रोड हुई हड़प
पुराने बस स्टैण्ड चौक में एक प्रसिद्ध रसूखदार दुकान ‘बजरंग चाय वाला’ की वजह से आधी सड़क पर कब्जा है। लेकिन निगम को यहाँ न कोई "अवैध अतिक्रमण" दिखता है, न "यातायात समस्या"। क्यों? क्योंकि मामला रसूख का है, और कानून सिर्फ़ कमज़ोरों के लिए।
निगम आयुक्त की चुप्पी – सवालों के घेरे में
ठेला-गुमटी वालों को हटाने की कार्रवाई तेज़ी से होती है, प्रेस नोट भी जारी होता है, फोटो भी खिंचते हैं — लेकिन राजीव प्लाजा, बजरंग चाय, और अन्य रसूखदार दुकानों पर कार्रवाई से निगम के हाथ काँपने लगते हैं। सवाल है – क्या निगम आयुक्त की नज़र सिर्फ़ मज़दूरों और मेहनतकशों पर टिकी है? या फिर उन्हें भी किसी दबाव में निष्क्रिय बना दिया गया है?
बिलासपुर की सड़कों पर आज ‘न्याय’ जाम में फँसा है, और जो प्रशासन इस जाम को खत्म करने का दावा कर रहा है, वही पक्षपात की गाड़ी चला रहा है।
अगर निगम को सच में यातायात सुधारना है, तो पहले उन्हें ये साबित करना होगा कि कानून सबके लिए बराबर है – सिर्फ़ गरीबों के लिए नहीं।
यह खबर एक आंदोलन की शुरुआत है।
अगर आप भी इस पक्षपात से तंग हैं, तो इस सवाल को उठाइए —
"क्या वाकई बिलासपुर में क़ानून सबके लिए बराबर है?"
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